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जिसे मिला सान्निध्य तुम्हारा, धन्य हुआ वह मानव मन,
अनुपम काव्य पुष्प शोभामय, सुंदर सहज हुआ उपवन | शिक्षा, सेवा, काव्य साधना, ध्येय रहा परहित चिंतन, निर्मल कुल की अमर ज्योति, हे! नतमस्तक हम निर्मल जन | |
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जिसे मिला सान्निध्य तुम्हारा, धन्य हुआ वह मानव मन,
अनुपम काव्य पुष्प शोभामय, सुंदर सहज हुआ उपवन | शिक्षा, सेवा, काव्य साधना, ध्येय रहा परहित चिंतन, निर्मल कुल की अमर ज्योति, हे! नतमस्तक हम निर्मल जन | |
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